
दिल्ली। हिमालयी क्षेत्रों में वनस्पति की निगरानी रखने वाले उपग्रह-बदलते मौसमों में घास के मैदान पनपने, वन क्षेत्र के रंग परिवर्तन, घाटियों में पेड़-पौधों में बदलाव, जलवायु संवेदनशीलता, मौसम स्थिति अनुकुलूता और बढ़ती चिंता की कहानी बयां करते हैं।
पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं, जो वैश्विक जोखिम और आपदाओं को और गंभीर बनाते हैं। जलवायु परिवर्तन वैश्विक औसत सतह तापमान को प्रभावित करता है, वर्षा की पद्धति में बदलाव लाता है और वनस्पति के आच्छादन को प्रभावित करता है। यह विभिन्न स्थानिक और समय अवधि पैमाने पर स्थानीय निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है।
उपग्रह डेटा को व्यापकता से संसाधित करने वाले वैश्विक प्लेटफॉर्म गूगल अर्थ इंजन (जीईई) का पर्यावरण निगरानी और पृथ्वी अवलोकन के लिए उपयोग से भू-क्षरण, मिट्टी और धूल संबंधी गतिशीलता, शहरी विकास, तापमान में बदलाव और इससे प्रभावित होने वाले स्वास्थ्य का अध्ययन होता है। यह डेटा के पूर्व-प्रसंस्करण और इन्हें संग्रहित करने की आवश्यकताएं कम करके वृहद विश्लेषण को सुगम बनाता है।




