छत्तीसगढ़राज्य

बस्तर में पहली बार संभाग स्तरीय टाइगर प्रोटेक्शन कार्यशाला का आयोजन

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन कर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

​विशेषज्ञों ने दी बाघ संरक्षण और ट्रैकिंग की बारीकियां
प्रशिक्षण सत्र के दौरान राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य श्री गौरव निलानी और एसडीओ श्री योगेश रात्रे ने प्रेजेंटेशन के जरिए वन कर्मियों को वन्यजीव संरक्षण के गुर सिखाए। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
​बाघ की विशेषताएं, उनका रहन-सहन, क्षेत्र (Territory) की पहचान और उनका व्यवहार। ​बाघ और तेंदुए के पगमार्क (पैर के निशान) तथा अन्य फील्ड साइन्स  में अंतर करना। ​नर और मादा बाघ की पहचान, पगमार्क के पैड इंप्रेशन और फोटोग्राफिक पहचान की तकनीक।
​बाघ के शिकार करने के तरीके, खरोंच के निशान और क्षेत्रीय मार्किंग की पहचान।
​कैमरा ट्रैप और मैदानी निगरानी की आधुनिक तकनीकें। वन्यजीव अपराधों को रोकने और मुखबीर तंत्र को मजबूत करने के उपाय।
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कार्यशाला के पहले दिन सैद्धांतिक जानकारी देने के बाद सभी प्रतिभागियों की एक परीक्षा भी आयोजित की गई, ताकि सीखे गए ज्ञान का आकलन किया जा सके। इस आयोजन का दूसरे दिन  फील्ड विजिट और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज करवाया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को जंगल में जाकर पगमार्क और अन्य वन्यजीव संकेतों की पहचान करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

​कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक (बस्तर) सुश्री स्टाइलो मंडावी, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री उत्तम गुप्ता, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक श्री गौतम नारायण पड़ीभार सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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