
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 14,655 करोड़ 73 लाख 55 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के लिए 2137 करोड़ 75 लाख 66 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग-नगरीय निकाय के लिए 27 करोड़ 9 लाख 95 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल के लिए 4922 करोड़ 64 लाख 79 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्य-भवन के लिए 2242 करोड़ 74 लाख 70 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं नगरीय विकास-नगरीय कल्याण के लिए 1698 करोड़ 98 लाख 70 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्यों से संबंधित विदेशों से सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 15 करोड़ 4 लाख 20 हजार रूपए, नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता हेतु 3444 करोड़ 62 लाख 45 हजार रूपए तथा खेल एवं युवा कल्याण के लिए 166 करोड़ 83 लाख 10 हजार रुपए शामिल हैं।
उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार की नीति, नीयत, कार्यक्रम और योजनाएं बजट में दिखती हैं। हमने पहले साल ज्ञान, दूसरे साल गति और इस साल संकल्प की थीम पर बजट प्रस्तुत किया है। सरकार के ये तीनों बजट जन कल्याण और जन आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बजट है। मोदी की एक-एक गारंटी को पहले दिन से पूरा करने का काम सरकार कर रही है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सदन में कहा कि जल जीवन मिशन के कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य के बजट से पूरा सहयोग मिल रहा है। कार्यों का कड़ाई से मूल्यांकन करते हुए पारदर्शिता के साथ निर्माण एजेंसियों को भुगतान किया जा रहा है। जिन योजनाओें के काम 80 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गए हैं, उन्हे प्राथमिकता से पूर्ण करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 5077 टंकियां बनाई गई है। गांव के सभी घरों मंे नल से पानी पहुंचने वाले 5028 से अधिक गांवों को हर घर जल प्रमाणित कराया गया है।
श्री साव ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में स्वीकृत 29 हजार 173 सिंगल विलेज योजनाओं में से 7000 योजनाएं पूर्ण हो गई है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 9 लाख परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने तथा शेष योजनाओं को पूर्ण करने के लिए 3000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण के लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में 7490 सोलर पंपों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था की गई है। इनके संचालन एवं संधारण के लिए 3 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं। ग्रामीण बसाहटों में हैण्डपंपों के संधारण के लिए आगामी बजट में 25 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से प्रदेश में स्थापित करीब 3 लाख हैण्डपंपों का संचालन-संधारण किया जाएगा।
श्री साव ने सदन में बताया कि समूह जल प्रदाय योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य मद से 20 करोड़ रूपए, नगरीय योजनाओं के ऋण के लिए 30 करोड़ रूपए तथा राज्य के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों जहां भूगर्भीय जल की उपलब्धता कम है तथा सतही स्रोत उपलब्ध है, उन क्षेत्रों में नाबार्ड पोषित योजना अंतर्गत 44 समूह जल प्रदाय योजना के लिए 260 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि धमतरी जिले में सिर्री समूह जल प्रदाय योजना के लिए 2 करोड़ रूपए, सुतियापाट जलाशय से ठाठापुर तक 54 गांवों तथा भीरा छीरपानी जलाशय से 66 गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधा…
[21:35, 9/3/2026] Pro Tamboli: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्व. सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि पर किया स्मरण
रायपुर 9 मार्च 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रख्यात भरथरी गायिका स्वर्गीय सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि 10 मार्च 2026 पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्व. सुरुज बाई खांडे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और लोकगायन परंपरा की एक विशिष्ट पहचान थीं। उन्होंने अपने अद्भुत कला कौशल और मधुर स्वर से भरथरी गायन परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया तथा छत्तीसगढ़ की लोकधारा को देश और दुनिया तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. सुरुज बाई खांडे ने लोक परंपराओं को सहेजने, उन्हें जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जो कार्य किया, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। उनका योगदान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाने में मील का पत्थर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. सुरुज बाई खांडे की कला, उनकी साधना और लोकसंस्कृति के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। प्रदेशवासी उनके अमूल्य योगदान को सदैव आदर और सम्मान के साथ स्मरण करते रहेंगे।



