Month: May 2026

  • छत्तीसगढ़​कबाड़ में जान फूंक दी जशपुर के ‘वेस्ट टू बेस्ट’ इको पार्क ने, नवाचार और संरक्षण का बना छत्तीसगढ़ में मॉडल

    ​कबाड़ में जान फूंक दी जशपुर के ‘वेस्ट टू बेस्ट’ इको पार्क ने, नवाचार और संरक्षण का बना छत्तीसगढ़ में मॉडल

    ​रायपुर,08 मई 2026/ ​छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले ने स्वच्छता और नवाचार की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है।…

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  • छत्तीसगढ़चूल्हे-चौके से बिजनेस तक गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस के जरिए लिखी सफलता की नई दास्तां

    चूल्हे-चौके से बिजनेस तक गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस के जरिए लिखी सफलता की नई दास्तां

    रायपुर, 08 मई 2026/आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने भाग्य को…

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  • छत्तीसगढ़​उच्च शिक्षा मंत्री से मिले कुलपति प्रो. दयाल

    ​उच्च शिक्षा मंत्री से मिले कुलपति प्रो. दयाल

    ​रायपुर, 08 मई 2026/ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के…

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  • छत्तीसगढ़छिंद के बीजों से तैयार होगी कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी

    छिंद के बीजों से तैयार होगी कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी

    रायपुर, 08 मई 2026/ बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार…

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  • छत्तीसगढ़राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्थानीय निकायो के आम/उप निर्वाचन हेतु कार्यक्रम जारी

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्थानीय निकायो के आम/उप निर्वाचन हेतु कार्यक्रम जारी

    छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग ने आज 8 मई 2026 को राज्य के नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम/उप निर्वाचन…

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  • छत्तीसगढ़पहाड़ी क्षेत्र में यात्रा सुगम बनाने के लिए तीन सुरंगें, घाटों से होकर सुरक्षित यात्रा की ओर

    पहाड़ी क्षेत्र में यात्रा सुगम बनाने के लिए तीन सुरंगें, घाटों से होकर सुरक्षित यात्रा की ओर

    इंदौर और खंडवा के बीच घुमावदार घाट वाली सड़कों पर वर्षों से केवल वाहन ही नहीं चलते थे। इन पर चिंता, देरी और अनिश्चितता भी छाई रहती थी। सिमरोल के किसान प्रदीप गौली को वे यात्राएँ अच्छी तरह याद हैं। उपज को बाजार तक ले जाना केवल दूरी की बात नहीं थी; यह जोखिम से भी जुड़ा था। तीखे मोड़, यातायात की भीड़ और कठिन घाट वाले इलाकों में वाहनों के पलटने का निरंतर भय, मंडी और बाजारों तक समय पर पहुंचना भी अनिश्चित बना देता था। खराब माल और बाजार के अवसरों का नुकसान, इस कठिन सड़क की कीमत का हिस्सा थे। हालांकि, यह वास्तविकता अब बदलने की दहलीज़ पर है। इंदौर-इच्छापुर कॉरिडोर के अंतर्गत, 33.4 किलोमीटर लंबे तेजाजी नगर-बलवारा खंड राष्ट्रीय राजमार्ग -347 बीजी को दो लेन से चार लेन में बदलने से इंदौर और खंडवा जैसे प्रमुख शहरों के बीच संपर्क मजबूत होगा। यह केवल सड़क चौड़ीकरण नहीं है। यह मध्य प्रदेश के एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संपर्क की पुनर्कल्पना है। इस कॉरिडोर के रास्ते उज्जैन और ओंकारेश्वर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को ले जाने वाले ड्राइवर रणजीत सिंह के लिए यह यात्रा हमेशा से ही सावधानी की मांग करती रही है। संकरी दो लेन वाली सड़कें, चुनौतीपूर्ण घाट खंडों से गुजरते हुए तीखे मोड़, बढ़ता यातायात और लगातार होने वाली दुर्घटनाएं हर यात्रा को ड्राइवर और यात्रियों दोनों के लिए तनावपूर्ण बना देती थीं। सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं थी और देरी होना आम बात थी। वर्षों से सड़क की इस हालत को देख रहे एक स्थानीय निवासी याद करते हुए बताते हैं कि कैसे बसें ढलानों से नीचे गिर जाती थीं और 10 किलोमीटर तक लंबा जाम लग जाता था, जो कभी-कभी कई दिनों तक लगा रहता था। ये छिटपुट घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक ऐसा सिलसिला था जिसने लोगों के जीवन, स्वास्थ्य सेवाओं और आजीविका को बाधित किया। महत्व और बुनियादी ढांचे के बीच इस अंतर ने एक अत्यावश्यक आवश्यकता को उजागर किया: एक आधुनिक, कुशल कॉरिडोर जो न केवल यात्रा को आसान बना सके, बल्कि आर्थिक प्रवाह को मजबूत कर सके, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दे सके और तेजी से विकसित हो रहे परिवहन नेटवर्क की मांगों को पूरा कर सके। पहाड़ी क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन सुरंगों का निर्माण इंदौर के पास तीन सुरंगों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। ये सुरंगें नई ऑस्ट्रियन टनलिंग विधि (एनएटीएम) का उपयोग करके बनाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में वाहनों का आवागमन, विशेष रूप से मानसून और व्यस्त यातायात के समय में अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगा। इनमें भेरूघाट सुरंग (575 मीटर), बैग्राम सुरंग (480 मीटर) और चोराल घाट सुरंग (550 मीटर) शामिल हैं। यह विकास सरकार द्वारा क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए शुरू की गई इंदौर-इच्छापुर कॉरिडोर पहल का हिस्सा है। भेरूघाट और चोराल घाट जैसे प्रमुख यातायात अवरोधों की समस्या इन सुरंगों के निर्माण से स्थायी रूप से हल हो जाएगी और दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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  • छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक फेरबदल : पुष्पा साहू बनीं माशिमं सचिव, रोक्तिमा यादव को कोरिया कलेक्टर की कमान

    छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक फेरबदल : पुष्पा साहू बनीं माशिमं सचिव, रोक्तिमा यादव को कोरिया कलेक्टर की कमान

    रायपुर। राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियां जारी की हैं।…

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  • छत्तीसगढ़विश्व रेड क्रॉस दिवस पर शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर केअटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में भव्य आयोजन

    विश्व रेड क्रॉस दिवस पर शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर केअटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में भव्य आयोजन

    रायपुर, 08 मई 2026/ भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर आज…

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  • छत्तीसगढ़IPL मैच से पहले रायपुर ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी जारी, जानिए कहां होगी पार्किंग

    IPL मैच से पहले रायपुर ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी जारी, जानिए कहां होगी पार्किंग

    राजधानी रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, नवा रायपुर में 10 और 13 मई को होने वाले…

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  • छत्तीसगढ़40 साल पुराने अपग्रेडेड यात्री आरक्षण प्रणाली में अगस्त से रेलगाड़ियों की होगी शिफ्टिंग

    40 साल पुराने अपग्रेडेड यात्री आरक्षण प्रणाली में अगस्त से रेलगाड़ियों की होगी शिफ्टिंग

    1986 में शुरू  हुई इस प्रणाली में पिछले 40 साल में कई छोटे बदलाव किए गए। लेकिन अब इसमें आमूलचूल परिवर्तन किया गया है । अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर  इसके  क्षमता का विस्तार किया गया है । रेल आरक्षण प्रणाली ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव देखे हैं। वर्ष 2002 में भारतीय रेलवे ने टिकटिंग में इंटरनेट का प्रयोग शुरू किया। आज यह प्रणाली इतनी लोकप्रिय है कि देश की ज्यादातर आबादी खिड़की की ओर रुख नहीं करती। देश में आज जितनी भी टिकटिंग की माँग है, उसका बड़ा हिस्सा (लगभग 88%) ऑनलाइन माध्यम से होता है। भारतीय रेल का मोबाइल ऐप रेलवन यात्रियों के बीच बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रेलवन ऐप की शुरुआत पिछले साल जुलाई में हुई थी। एक साल से कम समय में ही देशभर में अब तक 3.5 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। इस ऐप के लोकप्रिय होने के कई कारणों में से सबसे बड़ा कारण यह है कि यह ऐप देश के आम आदमी को रेल संबंधी सभी जानकारियाँ तो देता ही है, टिकटिंग तथा अन्य सेवाओं से जुड़ी उनकी शिकायतों का भी निपटारा करता है। आज जब आप अपनी टिकट बनाते हैं, तो रेलवन ऐप आपको यह बताता है कि आपकी वेटिंग में दिख रही टिकट कन्फर्म होगी या नहीं। टिकट के कन्फर्म होने की सटीक संभावना भी अब आपको एआई के माध्यम से रेलवन ऐप बताने लगा है। यह नई सुविधा इस साल की शुरुआत से ही लागू की गई है, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।  रेलवन ऐप पर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने के अनुमान की सटीकता पहले के 53 प्रतिशत से बढ़कर अब 94 प्रतिशत तक पहुँच गई है। रेलवन ऐप में इस तरह की कई एकीकृत एवं आधुनिक सुविधाएँ हैं, जो रेल संबंधी अन्य सभी सेवाओं को भी अपने में समाहित किए हुए हैं। जैसे – आरक्षित, अनारक्षित तथा प्लेटफॉर्म आदि विभिन्न प्रकार के टिकटों की बुकिंग, रद्दीकरण तथा रिफंड। इसके साथ-साथ आपके मौजूदा टिकट की वेटिंग स्थिति की ताज़ा जानकारी, ट्रेन के आने-जाने का समय, ट्रेन की वर्तमान स्थिति, ट्रेन के आने-जाने का प्लेटफॉर्म, आपके कोच की स्थिति, तथा रेल मदद जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी रेलवन ऐप पर उपलब्ध हैं। अपनी यात्रा के दौरान आप रेलवन ऐप पर भोजन भी ऑर्डर कर सकते हैं। यह ऐप आपको यह विकल्प देता है कि आपकी सीट तक आपका मनपसंद खाना पहुँच सके। आरामदायक एवं सेवापरक सुविधाओं से लैस यह रेलवन ऐप तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रोज़ाना इस ऐप के माध्यम से देशभर में 9.29 लाख टिकटें बुक हो रही हैं। इनमें 7.2 लाख टिकटें अनारक्षित तथा अन्य 2.09 लाख आरक्षित टिकटें हैं। अनारक्षित टिकटों में प्लेटफॉर्म टिकट भी शामिल है। एंड्रॉयड तथा आईओएस पर रेलवन ऐप को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। जहाँ 3 करोड़ 16 लाख लोगों ने इसे गूगल प्ले स्टोर से अब तक डाउनलोड किया है, वहीं 33.17 लाख लोगों ने इसे ऐपल फोन में डाउनलोड किया है। देश में यात्रियों के लिए भारतीय रेल एक जीवन रेखा है। भारतीय…

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