
लोक ऑपरेटिंग सिस्टम (लोकओएस) दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत एक वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म है। इसका मकसद स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके महासंघों का आद्यांत डिजिटलीकरण है। प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम डीएवाई-एनआरएलएम निर्धन ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार, कौशल आधारित रोजगारों और संवहनीय आजीविका को बढ़ावा देता है।
लोकओएस सदस्यों के रिकॉर्डों, विवरणों, बचत, ऋण, पुनर्भुगतान, वित्तीय लेनदेन, आजीविकाओं और अभिसरण पहलकदमियों के डिजिटलीकरण के माध्यम से एसएचजी और समुदाय आधारित संगठनों के लिए विस्तृत डिजिटल समाधान मुहैया कराता है। यह नीचे वर्णित उपायों से प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन को मजबूती देता है।
- डिजिटल रिकॉर्डों के जरिए कागजी हिसाब-किताब में कमी।
- एसएचजी के लिए लेनदेन की वास्तविक समय में ट्रैकिंग संभव।
- पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता में सुधार।
- लोकओएस एसएचजी नेटवर्क के अंदर प्रति वर्ष 200000 करोड़ रुपए की वित्तीय लेनदेन को दर्ज करता है।
लोकओएस के वेब और मोबाइल एप्लीकेशन अलग-अलग उपयोगकर्ता समूहों और कार्यों के लिए डिजाइन किए गए हैं। वेब एप्लीकेशन प्रशासकों, ई-लेखाकारों और लेनदेन की मंजूरी देने वालों को एसएचजी, ग्राम संगठनों (वीओ) और समूह स्तरीय महासंघों (सीएलएफ) के गठन और उन्हें स्वीकृति देने में सहायता करता है।
मोबाइल एप्लीकेशन जमीनी स्तर पर समुदाय आधारित संगठनों की गतिविधियों को कुशलता से दर्ज करना और उनका प्रबंधन संभव बनाता है।
- शुरुआत से अंत तक डिजिटल प्रबंधन: यह स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों, क्लस्टर स्तरीय संघों और उनके सदस्यों का पंजीकरण और प्रबंधन करता है।
- विशिष्ट डिजिटल आईडी: यह समुदाय-आधारित संगठनों और उनके सदस्यों के लिए आधार और बैंक खाते से जुड़ी विशिष्ट डिजिटल पहचान तैयार करता है।
- डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड: यह बचत, ऋण, पुनर्भुगतान और अन्य वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड रखता है।
- आजीविका फाइलिंग: यह योजना बनाने और सरकारी योजनाओं के साथ तालमेल बनाने के लिए आजीविका से जुड़े डेटा का रिकॉर्ड रखता है।
- भूमिका-आधारित प्रशासन: यह ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उपयोगकर्ताओं के प्रबंधन, स्वीकृतियों, निगरानी और रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करता है।
- वास्तविक समय के अनुसार विश्लेषण: यह डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए डैशबोर्ड और एक-क्लिक पर रिपोर्ट देता है।
लोकओएस: सामुदायिक संस्थानों के डिजिटल रूपांतरण को बढ़ावा देना
लोकओएस ने पूरे भारत में अपनी पहुँच का काफी विस्तार किया है, जिससे सामुदायिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर डिजिटल बदलाव संभव हुआ है। यह प्लेटफ़ॉर्म पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज की क्षमता को बेहतर बनाता है, साथ ही सभी स्तरों पर एकीकृत कार्यक्रम कार्यान्वयन और निगरानी करने में मदद करता है। फ़िलहाल, यह 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 762 ज़िलों, 7,241 ब्लॉक, 2.57 लाख ग्राम पंचायतों और 5.92 लाख गाँवों तक फैला हुआ है।
इसमें शामिल किए गए सामुदायिक संस्थान
इस प्लेटफॉर्म ने देश भर में सामुदायिक संस्थानों के बड़े पैमाने पर डिजिटल एकीकरण को सक्षम बनाया है। इससे जुड़े समुदाय और समुदाय-आधारित संस्थान निम्नलिखित हैं:
- क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ): 34,314
- ग्राम संगठन (वीओ): 5.62 लाख
- स्वयं सहायता समूह (एसएचजी): 94.16 लाख
- एसएचजी सदस्य: 10.03 करोड़




