
अधिकतर लोग हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों को तभी पहचान पाते हैं जब बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन सच यह है कि हमारा शरीर इसके आने से कई दिन, यहां तक कि महीनों पहले भी चेतावनी देना शुरू कर देता है। इन्हें प्रोड्रोमल लक्षण कहा जाता है। थकान, शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलना, या दिल की धड़कन का अनियमित या तेज़ होना ; ऐसे लक्षण अक्सर इस बात का संकेत होते हैं कि भविष्य में हार्ट अटैक हो सकता है। समय रहते इन्हें पहचान लेने से दिल को होने वाले बड़े नुकसान को टाला जा सकता है और गंभीर परिणामों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दिल की कमज़ोरी की शुरुआत, बिना किसी शोर के
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और गतिहीन जीवनशैली, धमनियों – यानी वे रक्तवाहिनियां जो ऑक्सीजन युक्त रक्त को दिल तक पहुंचाती और वापस ले जाती हैं ; के सिकुड़ने के प्रमुख कारण हैं। धूम्रपान रक्तवाहिनियों को नुकसान पहुंचाता है और उनमें खून का थक्का जमने की आशंका बढ़ा देता है, जिससे ये और सिकुड़ जाती हैं या पूरी तरह बंद हो जाती हैं। दुर्भाग्य से, यह समस्या अब युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी आम होती जा रही है। मेडिकल डायलॉग्स की एक रिपोर्ट (10 नवंबर, 2025) के अनुसार, भारत में 40 वर्ष से कम आयु के लगभग चार में से एक से पांच में से एक व्यक्ति को हार्ट अटैक होता है, और इनमें से लगभग आधे मामले 50 वर्ष की आयु से पहले सामने आते हैं। इसके अलावा, 2023 से 2026 के बीच जारी कई विशेषज्ञ रिपोर्टों का अनुमान है कि भारत में होने वाले सभी हार्ट अटैक का 25% हिस्सा 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में होता है।
दिल की पहली चेतावनी: ये छह संकेत s
सबसे सामान्य प्रोड्रोमल लक्षण है सीने में दर्द या बेचैनी। ऐसा तब होता है जब दिल को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता। यह लक्षण अक्सर उरोस्थि (स्टर्नम, यानी सीने के बीचोंबीच स्थित लंबी, चपटी हड्डी जो पसलियों से जुड़ी होती है) के पीछे हल्के दर्द के रूप में महसूस होता है, लेकिन तेज़ दर्द भी एक खतरनाक स्थिति का संकेत हो सकता है। दर्द के अलावा, कई हृदय रोगी अपने पैरों या टखनों में सूजन आने की शिकायत भी करते हैं। यह ऊतकों में तरल पदार्थ जमा होने का संकेत है, जो हृदय की विफलता के कारण होता है। एक और लक्षण है अचानक शुरू होने वाली खांसी जिसमें बलगम आता है – यह पल्मोनरी एडिमा (फेफड़ों में पानी भरना) का विशिष्ट संकेत है। धड़कन का असामान्य रूप से महसूस होना (हार्ट पैल्पिटेशन) भी एक चिंताजनक लक्षण है, क्योंकि यह अतालता (एरिथमिया) का संकेत हो सकता है। जब दिल कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता, तो सांस लेना भी मुश्किल होने लगता है। बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक और असामान्य थकान महसूस होना यह दर्शाता है कि शरीर को आवश्यक मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इन सभी लक्षणों के बारे में डॉक्टर से अवश्य चर्चा करनी चाहिए।
सरल जांचें बताएंगी आपके दिल की स्थिति
यह जानने के लिए कि आप किसी खतरे में हैं या नहीं, कई सरल जांचें की जा सकती हैं। जैसे कि ब्लड प्रेशर की जांच। इसके लिए बेहतर होगा कि जांच से पहले कॉफी, सिगरेट और तनावपूर्ण स्थितियों से बचा जाए। सामान्य रक्तचाप 110-130 / 70-90 mm Hg के बीच माना जाता है। ईसीजी (ECG) के दौरान त्वचा पर इलेक्ट्रोड लगाकर दिल की विद्युतीय गतिविधि दर्ज की जाती है। इससे यह पता चलता है कि धड़कन में कोई असामान्यता तो नहीं है, जैसे अतालता (अनियमित धड़कन)। बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की निगरानी से यह आकलन किया जा सकता है कि अतिरिक्त वज़न के कारण दिल पर कितना अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। एक बायोकेमिकल ब्लड टेस्ट से रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता चलता है, जो एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों के सख्त होने) के जोखिम का एक प्रमुख संकेतक है।
छोटी आदतें, जोखिम में 80% तक की कमी
मेडिटेरेनियन या डैश (DASH) डाइट को अपनाकर, हफ्ते में 1.5 घंटे हल्की से मध्यम तीव्रता की उम्र के अनुरूप एक्सरसाइज़ करके, 6–8 घंटे की नींद लेकर, तनाव कम रखकर और नशे की आदतों से दूर रहकर एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को लगभग आधा किया जा सकता है। दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम करने के लिए ये सभी उपाय हर कोई आसानी से अपना सकते हैं।
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