
ग्राम करनपुर में ढोकरा शिल्प की जटिल निर्माण प्रक्रिया ने विशेषज्ञों को विशेष रूप से प्रभावित किया। वहीं ग्राम छोटेराजपुर एवं कुसमा में रॉट आयरन शिल्पकला को बारीकी से समझते हुए संबंधित समूहों से चर्चा की गई और बाजार से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरान राज्य कार्यालय से सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मनोज मिश्रा के नेतृत्व में जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोण्डागांव अविनाश भोई के मार्गदर्शन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुंजलाल सिन्हा ने शिल्पकारों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित किया।
विशेषज्ञों ने माना कि कोण्डागांव के शिल्पकारों में अद्भुत कौशल और सृजनात्मकता है। उन्होंने कहा कि यदि इन उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर फिनिशिंग और प्रभावी ब्रांडिंग का सहयोग मिले, तो इनके मूल्य में कई गुना वृद्धि संभव है। साथ ही उन्होंने बाजार के नए रुझान, ग्राहकों की पसंद और आकर्षक पैकेजिंग के महत्व के प्रति शिल्पकारों को जागरूक किया।



