छत्तीसगढ़राज्य

समंदर में गूंजा भारत का शंखनाद, पीएम मोदी के विजन से नई ऊंचाइयों पर भारत की समुद्री ताकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय नौसेना तेजी से आधुनिक और आत्मनिर्भर बन रही है। स्वदेशी डिजाइन और निर्माण पर जोर देते हुए नौसेना को अत्याधुनिक युद्धपोतों से लैस किया जा रहा है, जिससे भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है।

हाल ही में INS महेंद्रगिरी को कमीशन किए जाने के साथ ही भारतीय नौसेना की क्षमता में एक और महत्वपूर्ण इजाफा हुआ है। INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय के बाद अब INS महेंद्रगिरी का शामिल होना स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भारत की प्रगति का बड़ा प्रतीक है। भारतीय नौसेना के अगली पीढ़ी के ये जहाज सतह युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और तटीय एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने के साथ हिंद महासागर में एक मजबूत और बहुस्तरीय सुरक्षा कवच बनाते हैं।

रणनीतिक महत्व
भारत की स्ट्रेटेजिक लोकेशन और बढ़ता इकोनॉमिक असर, समुद्री सुरक्षा को ज़रूरी बनाते हैं। भारत की लगभग 11,098 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) और 90% से ज्यादा व्यापार समुद्री मार्गों से निर्भर होने के कारण आधुनिक नौसेना का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत जरूरी है। ऐसे में सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) तथा हालिया ‘MAHASAGAR’ विजन के तहत स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दी है। इसका नतीजा है कि भारत अब युद्धपोत खरीदार से आगे बढ़कर उन्हें बनाने वाले देश के रूप में उभर रहा है।

हालिया उपलब्धियां

– 21 जून 2026: कोलकाता में एक साथ तीन स्वदेशी जहाज कमीशन किए गए — INS दूनागिरी (नीलगिरी क्लास स्टील्थ फ्रिगेट), INS संशोधक (संधायक क्लास सर्वे वेसल) और INS अग्रय (अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट)।

– 11 जुलाई 2026: विशाखापत्तनम में INS महेंद्रगिरि (नीलगिरी क्लास) को नौसेना में शामिल किया गया। ये सभी जहाज भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिजाइन किए गए और देशी शिपयार्ड्स (GRSE, Mazagon Dock आदि) में निर्मित हैं, जिसमें उच्च स्तर का स्वदेशीकरण शामिल है।

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