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चक्रवात ‘अर्नब’ का छत्तीसगढ़ में असर, भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

रायपुर। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इसे देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के किसानों के लिए विशेष मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों को सतर्क रहने तथा धान सहित अन्य खरीफ फसलों, उद्यानिकी फसलों और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाने की सलाह दी है।

कृषि मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ 28 अक्टूबर को सुबह 2 बजे से 8 बजे के बीच आंध्रप्रदेश के तटीय क्षेत्रों को पार कर गया है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक अलग-अलग स्थानों पर हल्की से अति भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार 28 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर मध्यम वर्षा (15 से 64 मिमी), कुछ स्थानों पर भारी वर्षा (64 से 115 मिमी) तथा एक-दो स्थानों पर अति भारी वर्षा (115 से 204 मिमी) हो सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। हवा की गति कुछ स्थानों पर 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

28 अक्टूबर को कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना
कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 28 अक्टूबर को सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, रायपुर, कोरिया, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा- मरवाही, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव एवं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

वहीं बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायपुर, दुर्ग, बालोद, धमतरी, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा जिलों में अधिकांश स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा के साथ गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है।

29 अक्टूबर को भी जारी रहेगा बारिश का दौर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 29 अक्टूबर को प्रदेश के बस्तर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, कोरिया एवं कोरबा जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, सक्ती, सारंगढ़- बिलाईगढ़, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, खैरागढ़- छुईखदान- गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद एवं रायपुर जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है।

30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच प्रदेश के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, मुंगेली, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़- बिलाईगढ़ एवं बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा तथा एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात होने की संभावना जताई गई है।

धान की पकी फसलों की शीघ्र कटाई कर सुरक्षित स्थानों पर रखें
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए धान, मक्का एवं तिलहन सहित खरीफ फसलों की पकने की अवस्था में शीघ्र कटाई कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भंडारित करें। जिन किसानों ने फसलों की कटाई प्रारंभ कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर रखें। खेतों में खड़ी फसलों की नियमित निगरानी करें तथा वर्षा के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न होने दें।

किसानों को खेतों में अतिरिक्त जल की निकासी की समुचित व्यवस्था करने तथा फसलों के गिरने से बचाव के लिए आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए किसान फिलहाल गेहूं, चना एवं मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई स्थगित रखें। मौसम साफ होने के बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह में रबी फसलों की बुआई प्रारंभ करने की सलाह दी गई है।

फसल की गुणवत्ता बनाए रखने सुरक्षित भंडारण पर विशेष जोर
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को उपज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। किसानों से कहा गया है कि शीघ्र खराब होने वाली कृषि उपज को ढंककर रखें। अनाज का भंडारण साफ, हवादार एवं सुरक्षित स्थानों पर करें। भंडारण से पहले अनाज को उपयुक्त नमी स्तर तक सुखाना आवश्यक है।

बीजों के भंडारण से पहले उनकी अंकुरण क्षमता एवं कीट प्रबंधन का ध्यान रखें। भंडारण स्थलों में छत, फर्श एवं जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि बारिश के कारण उपज क

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