
कभी घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे अबूझमाड़ के कटेर गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। बारिश के दिनों में संकरी पगडंडियां भी कीचड़ में बदल जाती थीं। बीमारों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में घंटों लग जाते थे। आज वही गांव पक्की सड़क से जुड़ चुका है और इसके साथ ही ग्रामीणों की जिंदगी भी बदलने लगी है।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक 8.75 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग 8.56 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, बल्कि अबूझमाड़ के दूरस्थ जनजातीय अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन गई है।
सड़क बनने के बाद अब एम्बुलेंस, शासकीय वाहन और अन्य जरूरी सेवाएं सीधे गांव तक पहुंच रही हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलने लगा है। स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति भी बढ़ी है।




